कानून, शिकायत प्रक्रिया और सजा
मानसिक उत्पीड़न (Mental Harassment) तब माना जाता है जब कोई व्यक्ति बार-बार बुरे शब्द बोलकर, ताने मारकर, धमकाकर, अफवाह फैलाकर या अपमानजनक व्यवहार करके किसी को मानसिक रूप से परेशान करे। इस तरह की मानसिक प्रताड़ना से पीड़ित की दिमागी सेहत पर गहरा पड़ता है।
भारत में इसके लिए कोई अलग से “मानसिक उत्पीड़न कानून” नहीं है, लेकिन ऐसे मामलों में घरेलू हिंसा अधिनियम और BNS की धाराओं के तहत कार्रवाई की जा सकती है। इस आर्टिकल में, हम सरल भाषा में समझेंगे कि मेंटल हैरेसमेंट कैसे होता है – इसके प्रकार, कानून, मानसिक प्रताड़ना की सजा और शिकायत दर्ज कराने की प्रक्रिया।
मानसिक उत्पीड़न क्या है – Mental Harassment meaning in Hindi
मानसिक उत्पीड़न तब होता है जब कोई व्यक्ति या कुछ लोग मिलकर किसी दूसरे व्यक्ति को जानबूझकर परेशान करते हैं, और उनकी इज्जत या छवि खराब करने के लिए बार-बार बुरी हरकतें या बुरे शब्द इस्तेमाल करते हैं। इसका मकसद पीड़ित को मानसिक रूप से तोड़ना होता है। इस तरह की मानसिक प्रताड़ना को कानून अलग-अलग जगहों पर क्रूरता का एक रूप मानता है।
कोर्ट ने माना है कि मानसिक उत्पीड़न शारीरिक चोट जितना ही हानिकारक हो सकता है। शारीरिक चोटें तो ठीक हो जाती हैं, लेकिन मानसिक क्रूरता का असर लंबे समय तक रहता है, जिससे व्यक्ति को डिप्रेशन जैसी गंभीर समस्याएँ हो सकती हैं।
मानसिक प्रताड़ना कैसे होता है?
नीचे हमने कुछ ऐसे बाते बताई है जो मानसिक प्रताड़ना का रूप हो सकती है:
- किसी को गालियाँ देना या उसकी बेइज़्ज़त करना
- किसी के चरित्र पर शक करना
- अकेला कर देना, बात न करना
- लगातार ताने मारना या नीचा दिखाना
- बार बार धमकी देना जैसे कि “मैं खुद को नुकसान पहुँचा दूँगा/दूँगी”, “तुम्हें जेल भिजवा दूँगा/दूँगी”
- किसी की चीज़ कंट्रोल करना: पैसे, फोन, बाहर जाना
- इमोशनल ब्लैकमेल करना जैसे कि “मेरी वजह से जीते हो, वरना तुम कुछ नहीं”
- किसी से लगातार झगड़ा करना, उसे प्रताड़ित करना
इनमें से कोई भी व्यवहार अगर बार-बार हो रहा है और आपकी मानसिक सेहत पर असर डाल रहा है, तो यह मानसिक उत्पीड़न है।
मानसिक प्रताड़ना के प्रकार और कानून
किसी के साथ मानसिक प्रताड़ना या उत्पीड़न केवल शादी या घर तक सीमित नहीं है, बल्कि यह जीवन के कई क्षेत्रों में हो सकता है। यहाँ इसके मुख्य प्रकार दिए गए हैं:
1. शादीशुदा जिंदगी में पति या ससुरवाल वालो द्वारा प्रताड़ना
वैवाहिक जिंदगी में, मानसिक उत्पीड़न तलाक का मुख्य आधार है और पति या पत्नी को मानसिक प्रताड़ित करना आपराधिक श्रेणी में आता है। जैसे कि पति या पत्नी को लगातार नीचा दिखाना, उसकी आज़ादी को सीमित करना (जैसे बाहर न जाने देना), या दहेज की मांग के लिए मानसिक दबाव बनाना इत्यादि।
- BNS धारा 85 (पहले IPC 498A): यह कानूनी धारा शादीशुदा महिला के ख़िलाफ़ क्रूरता के केस में लगती है। इसमें मानसिक नुकसान पहुंचाना शामिल है।
- घरेलू हिंसा अधिनियम (DV Act): घरेलू हिंसा अधिनियम (DV Act) विशेष रूप से महिलाओं को मानसिक, भावनात्मक, आर्थिक और मौखिक हिंसा से सुरक्षा देता है।
2. कामकाज की जगह उत्पीड़न
ऑफिस या नौकरी में मानसिक उत्पीड़न बहुत आम है लेकिन लोग डर के कारण शिकायत नहीं करते। कानून इसे भी गंभीर अपराध मानता है। कामकाज की जगह पर मानसिक प्रताड़ना को रोकने के लिए खास कानून बनाए गए हैं।
ऑफिस या काम करने की जगह पर मानसिक उत्पीड़न इन रूपों में नजर आता है:
- सहयोगियों द्वारा अपमान या मज़ाक उड़ाना
- ओवरवर्क करवाना या फालतू दबाव डालना
- बॉस का गाली देना, डराना, धौंस दिखाना
- किसी की जाति, उम्र, जेंडर या मैरिटल स्टेटस पर टिप्पणी करना
- जानबूझकर प्रमोशन रोकना
- गलत आरोप लगाना
जब किसी के साथ इस तरह का मेंटल हैरेसमेंट होता है तो दोषियों के खिलाफ POSH Act (2013) और BNS की धाराएं के तहत कार्रवाई की जा सकती हैं।
3. बुजुर्ग माता पिता और बच्चो का उत्पीड़न
अगर बच्चे अपने बुजुर्ग माता-पिता को रोटी-पानी या दवाई जैसी बुनियादी ज़रूरतें पूरी नहीं करते, या उन पर चिल्लाते हैं, तो यह माता-पिता और वरिष्ठ नागरिक भरणपोषण तथा कल्याण अधिनियम, 2007 के तहत आता है।
बच्चों को मानसिक या भावनात्मक रूप से चोट पहुँचाना या उन्हें डराना धमकाना, किशोर न्याय अधिनियम (JJ Act) और पॉक्सो अधिनियम (POSCO Act) के तहत दंडनीय है।
मानसिक उत्पीड़न के खिलाफ कानूनी धाराएं और सज़ा
मानसिक प्रताड़ना की गंभीरता को देखते हुए, अलग-अलग अपराधों के लिए भारतीय न्याय संहिता (BNS) और अन्य कानूनों में सख्त सज़ा का प्रावधान है।
1. वैवाहिक क्रूरता (BNS धारा 85) और सज़ा
- अपराध: पति या उसके रिश्तेदारों द्वारा विवाहित महिला मानसिक रूप से प्रताड़ित करना या उसे आत्महत्या के लिए उकसाना।
- कानून:BNS Section 85
- सज़ा: इस धारा के तहत 3 साल तक की जेल और जुर्माना हो सकता है।
2. बच्चों के मानसिक उत्पीड़न और सज़ा
- अपराध: बच्चों के साथ यौन प्रकृति का मानसिक दुर्व्यवहार या उन्हें डराना धमकाना।
- कानून: POCSO Act, 2012
- सज़ा: पोक्सो एक्ट की विभिन्न धाराओं के तहत 5 साल से लेकर आजीवन कारावास तक की सज़ा हो सकती है, यदि मानसिक उत्पीड़न का आधार यौन अपराध हो।
3. अन्य उत्पीड़न के लिए सज़ा
- पीछा करना (Stalking): किसी का पीछा करके उसे परेशान करना BNS की धारा 78 के तहत अपराध की श्रेणी में आता है। इसके लिए 3 साल तक की जेल हो सकती है।
- किसी को आत्महत्या के लिए उकसाना: किसी को इतना परेशान करना कि को आत्महत्या के लिए मजबूर हो जाए तो ऐसे में उस पर BNS की धारा 108 लग सकती है, जिसके लिए दोषो को 10 साल की सजा हो सकती है।
मानसिक उत्पीड़न की शिकायत दर्ज कराने की प्रक्रिया
मानसिक उत्पीड़न की शिकायत दर्ज कराना और कानूनी प्रक्रिया शुरू करने के लिए आपको नीचे दिए स्टेप्स को फॉलो करना है:
1. शिकायत के लिए ज़रूरी सबूत
मानसिक प्रताड़ना होने पर कंप्लेंट दर्ज कराने में सबूतों को इकठ्ठा करना बहुत जरुरी होता है। आपको सबसे पहले नीचे बताए सबूतों को जुटाना है।
- रिकॉर्डिंग और मैसेज: ऑडियो रिकॉर्डिंग, वीडियो रिकॉर्डिंग, और मैसेज जिनमें गाली-गलौज या धमकी दी गई हो।
- डॉक्टर का प्रमाण पत्र: किसी डॉक्टर या मनोचिकित्सक से मिला मानसिक तनाव का प्रमाण पत्र।
- गवाह: आपके मित्र, रिश्तेदार या सहकर्मी जिन्होंने उत्पीड़न होते हुए देखा या सुना हो, उनके बयान।
2. शिकायत दर्ज करने के तरीके
मानसिक प्रताड़ना के खिलाफ शिकायत दर्ज करने के लिए आपके पास कई रास्ते खुले हैं:
- पुलिस में FIR: आप सीधे पुलिस स्टेशन में BNS की धारा 85 के तहत FIR दर्ज करवा सकते हैं।
- घरेलू हिंसा अधिनियम (DV Act): उत्पीड़न की शिकार महिला घरेलू हिंसा अधिनियम, 2005 की धारा 12के तहत कोर्ट में याचिका दायर कर सकती है। इस धारा के तहत दोषी को जल्दी सजा मिलती है।
- तलाक याचिका: वैवाहिक उत्पीड़न के मामले में, आप तलाक याचिका के साथ उत्पीड़न के सभी साक्ष्यों को पेश करके तलाक मांग सकते हैं।
- कामकाज की जगह: अगर आपके साथ ऑफिस या कामकाज वाली जगह उत्पीड़न हुआ है तो आपको आंतरिक शिकायत समिति (ICC) में शिकायत दर्ज करानी चाहिए।

Advocate M L Khan
