1. अदालत ने क्या आदेश दिया?
दिल्ली की स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट कोर्ट ने 14 अक्टूबर 2026 को कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के दो नेताओं सौरव दास और आशुतोष रंका को पाँच दिन की न्यायिक हिरासत में भेजने का आदेश दिया। उन्हें तिहाड़ जेल भेजा गया। पार्टी के एक अन्य नेता अजिंक्य शिंदे को व्यक्तिगत मुचलके पर रिहा कर दिया गया।
2. पूरा मामला क्या है?
दिल्ली पुलिस के अनुसार, 13 अक्टूबर को CJP के नेताओं और कार्यकर्ताओं के एक समूह ने जंतर-मंतर में प्रवेश करने की कोशिश की। रिपोर्ट के मुताबिक, जंतर-मंतर को आधिकारिक विरोध-प्रदर्शन स्थल की सूची से हटाए जाने के एक दिन बाद यह घटना हुई।
पुलिस का आरोप है कि समूह के सदस्यों ने बंद लोहे के गेट और बैरिकेड पार किए। उनके पास भारतीय राष्ट्रीय ध्वज था और वे नारे लगा रहे थे। इसके बाद सुरक्षा कर्मियों ने उन्हें रोक लिया।
3. पुलिस ने किन आरोपों में कार्रवाई की?
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, इस मामले में पुलिस ने दो अलग-अलग मामले दर्ज किए। इनमें निम्नलिखित आरोप शामिल बताए गए हैं:
गैरकानूनी रूप से एकत्र होना।
लोक सेवक द्वारा जारी आदेश की अवज्ञा करना।
कथित अनधिकृत प्रवेश और संबंधित परिसर में घुसने के आरोप।
पुलिस के काम में बाधा डालने तथा आपराधिक साजिश से जुड़े आरोप।
पुलिस ने यह भी दावा किया कि समूह के कुछ सदस्यों ने पुलिसकर्मियों को रोकने की कोशिशों के दौरान धक्का-मुक्की की। ये पुलिस के आरोप हैं; इन्हें अदालत द्वारा दोष सिद्ध किए जाने के बराबर नहीं माना जाना चाहिए।
4. CJP नेताओं को पहले भी हिरासत में लिया गया था
रिपोर्ट के अनुसार, सौरव दास और आशुतोष रंका को इससे पहले भी मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रदर्शन करने के लिए दिल्ली पहुँचने पर हिरासत में लिया गया था।उस मामले में उन्हें शांति बनाए रखने और शांति भंग करने वाली गतिविधियों से दूर रहने संबंधी कानूनी बॉन्ड भरने के बाद रिहा किया गया था। पुलिस ने इस पुराने मामले और कथित बॉन्ड उल्लंघन को बाद की कार्रवाई के संदर्भ में उठाया।
5. CJP की तरफ से क्या कहा गया?
CJP की लीगल अफेयर्स प्रमुख रत्ना सिंह ने आरोप लगाया कि नेताओं को देर रात तक अपने वकीलों से मिलने की अनुमति नहीं दी गई। उन्होंने बताया कि नेताओं को पहले जाफरपुर कलां पुलिस स्टेशन ले जाया गया और बाद में संसद मार्ग पुलिस स्टेशन पहुँचाया गया।यह बयान CJP की तरफ से सामने आया है। वकीलों से मिलने में कथित बाधा के संबंध में उपलब्ध रिपोर्ट में पुलिस का विस्तृत जवाब नहीं दिया गया है।
6. जंतर-मंतर को लेकर विवाद क्यों है?
जंतर-मंतर दिल्ली में विरोध-प्रदर्शनों का एक ऐतिहासिक स्थल रहा है। इसे आधिकारिक प्रदर्शन स्थल के रूप में हटाए जाने के बाद वहाँ प्रदर्शन करने की अनुमति और नागरिकों के विरोध के अधिकार को लेकर विवाद सामने आया।CJP मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विरोध-प्रदर्शन और चुनावी मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) से जुड़े मुद्दों पर सक्रिय रही है। इस घटना में पुलिस की कार्रवाई और प्रदर्शन स्थल पर प्रवेश को लेकर दोनों पक्षों के दावों को अलग-अलग समझना आवश्यक है।
7. क्या दोनों नेताओं को दोषी ठहरा दिया गया है?
नहीं। पाँच दिन की न्यायिक हिरासत का आदेश अपने आप में दोषसिद्धि नहीं है। इसका अर्थ है कि अदालत के आदेश के अनुसार आरोपी इस अवधि में न्यायिक हिरासत में रहेंगे। आरोपों पर अंतिम निर्णय संबंधित कानूनी प्रक्रिया और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर होगा।
