डीसीपी विक्रांत वीर और इंस्पेक्टर विक्रम सिंह पर विभागीय कार्रवाई;
लखनऊ, उत्तर प्रदेश | 19 अक्टूबर 2026
InterGlobe NEWS | विशेष रिपोर्ट
लखनऊ। राजधानी लखनऊ में कारोबारी शिवा शर्मा की मौत का मामला लगातार चर्चा में है। हजरतगंज क्षेत्र स्थित अवध ग्रीन अपार्टमेंट की चौथी मंजिल से गिरने के बाद 9 अक्टूबर को शिवा शर्मा की मौत हो गई थी। शुरुआत में घटना को ऊंचाई से गिरने से हुई मौत के रूप में देखा गया, लेकिन परिजनों की शिकायत के बाद पुलिस ने हत्या के आरोप में मुकदमा दर्ज किया।
मामले में श्रद्धा दुबे, उनकी बहन रश्मि दुबे और तनवीर अली उर्फ दानिश सहित अन्य लोगों के नाम सामने आए हैं। पुलिस के अनुसार, तीन आरोपी फिलहाल फरार हैं और उनकी तलाश के लिए कई टीमें लगाई गई हैं।
इस बीच, मामले की जांच और आरोपियों की गिरफ्तारी में हुई प्रगति को लेकर पुलिस विभाग में भी कार्रवाई हुई है। 19 अक्टूबर को प्रकाशित रिपोर्टों के मुताबिक, डीसीपी सेंट्रल जोन विक्रांत वीर को पद से हटाकर डीजीपी मुख्यालय से संबद्ध किया गया। इससे पहले हजरतगंज थाने के इंस्पेक्टर विक्रम सिंह को भी लाइन हाजिर किया गया था।
क्या है पूरा मामला?
प्रकाशित रिपोर्टों के अनुसार, 9 अक्टूबर को लखनऊ के हजरतगंज क्षेत्र स्थित अवध ग्रीन अपार्टमेंट की चौथी मंजिल से गिरने के बाद कारोबारी शिवा शर्मा की मौत हो गई थी। वह अलीगंज के कपूरथला क्षेत्र में रहते थे।
शिवा की मां रंजना शर्मा की शिकायत के बाद पुलिस ने हत्या का मुकदमा दर्ज किया। शिकायत में श्रद्धा दुबे, उनकी बहन रश्मि दुबे, ड्राइवर दानिश और अन्य लोगों पर आरोप लगाए गए।
पुलिस जांच में पोस्टमार्टम रिपोर्ट भी महत्वपूर्ण साक्ष्य के रूप में सामने आई है। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, रिपोर्ट में शरीर पर 11 बाहरी चोटों का उल्लेख किया गया था। हालांकि, चोटों की परिस्थितियों और मौत के वास्तविक घटनाक्रम का निर्धारण जांच तथा उपलब्ध साक्ष्यों के विश्लेषण से ही होगा।
पुलिस अधिकारियों पर क्यों हुई कार्रवाई?
मामले में आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं होने और जांच की प्रगति को लेकर सवाल उठने के बीच पुलिस विभाग ने अधिकारियों के स्तर पर कार्रवाई की।
19 अक्टूबर की रिपोर्ट के अनुसार, डीसीपी सेंट्रल जोन विक्रांत वीर को उनके पद से हटाकर डीजीपी मुख्यालय से संबद्ध किया गया। इससे पहले हजरतगंज थाने के इंस्पेक्टर विक्रम सिंह को लाइन हाजिर किया गया था।
इन कार्रवाइयों के बीच पुलिस फरार आरोपियों की तलाश में जुटी हुई है। हालांकि, अधिकारियों को पद से हटाए जाने का आदेश अपने आप में किसी अधिकारी के विरुद्ध आपराधिक दोष सिद्ध होने का प्रमाण नहीं है। विभागीय कार्रवाई और आपराधिक जांच अलग-अलग प्रक्रियाएं हैं।
श्रद्धा दुबे की तलाश, इनाम बढ़ाकर 50 हजार रुपये
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, पुलिस ने श्रद्धा दुबे और अन्य आरोपियों की तलाश के लिए कई टीमें गठित की हैं। संभावित ठिकानों पर दबिश दी जा रही है और तकनीकी निगरानी की मदद से आरोपियों का पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है।
18 अक्टूबर को प्रकाशित रिपोर्टों में बताया गया कि श्रद्धा दुबे की गिरफ्तारी के लिए घोषित इनाम 25 हजार रुपये से बढ़ाकर 50 हजार रुपये कर दिया गया। अन्य आरोपियों की तलाश भी जारी है।
पुलिस की ओर से नेपाल सीमा से जुड़े संभावित सुरागों की जांच किए जाने की खबरें भी सामने आई हैं। हालांकि, श्रद्धा दुबे की वर्तमान लोकेशन की स्वतंत्र और आधिकारिक पुष्टि उपलब्ध रिपोर्टों से नहीं होती।
अदालत में आत्मसमर्पण की अर्जी का मामला
18 अक्टूबर को प्रकाशित रिपोर्टों के अनुसार, श्रद्धा दुबे की ओर से अदालत में आत्मसमर्पण से संबंधित अर्जी दाखिल किए जाने की जानकारी सामने आई थी।
हालांकि, अर्जी दाखिल होने की खबर और वास्तव में अदालत में आत्मसमर्पण कर देने के बीच अंतर है। उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक, 19 अक्टूबर तक श्रद्धा दुबे की गिरफ्तारी या आत्मसमर्पण की पुष्टि नहीं हुई थी।
इसलिए मामले में आगे की स्थिति जानने के लिए संबंधित अदालत के रिकॉर्ड और पुलिस के आधिकारिक बयान की पुष्टि आवश्यक है।
श्रद्धा दुबे ने आरोपों को नकारा
इस मामले में एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम तब सामने आया, जब श्रद्धा दुबे ने मीडिया से बातचीत में अपने ऊपर लगाए गए आरोपों को खारिज किया।
18 अक्टूबर को प्रकाशित एक रिपोर्ट के अनुसार, उन्होंने दावा किया कि शिवा शर्मा की मौत हत्या नहीं, बल्कि आत्महत्या थी। उन्होंने यह भी कहा कि इमारत के सीसीटीवी फुटेज की जांच से उनका पक्ष स्पष्ट हो सकता है।
यह श्रद्धा दुबे का अपना पक्ष है। उनके दावों की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध नहीं है और इन बयानों से मामले का अंतिम निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता। पुलिस को सीसीटीवी फुटेज, पोस्टमार्टम रिपोर्ट, घटनास्थल से जुड़े साक्ष्य और संबंधित लोगों के बयानों की जांच के आधार पर आगे की कार्रवाई करनी होगी।
जांच में किन सवालों के जवाब तलाशना जरूरी?
शिवा शर्मा की मौत के मामले में कई महत्वपूर्ण सवालों के जवाब जांच के बाद ही स्पष्ट होंगे:
- शिवा शर्मा के चौथी मंजिल से गिरने से पहले वास्तव में क्या हुआ था?
- घटनास्थल और आसपास के सीसीटीवी फुटेज में क्या सामने आया है?
- पोस्टमार्टम रिपोर्ट और अन्य फॉरेंसिक साक्ष्य घटनाक्रम के बारे में क्या बताते हैं?
- परिजनों की शिकायत में लगाए गए आरोपों की पुष्टि किन साक्ष्यों से होती है?
- फरार आरोपियों का पता कब चलेगा और वे जांच में कब शामिल होंगे?
- अदालत में आत्मसमर्पण की अर्जी पर क्या कार्यवाही हुई?
इन सवालों का जवाब पुलिस जांच और न्यायिक प्रक्रिया से ही सामने आ सकेगा।
निष्पक्ष जांच और न्यायिक प्रक्रिया पर टिकी निगाहें
शिवा शर्मा की मौत का मामला अब पुलिस जांच, फरार आरोपियों की तलाश और विभागीय कार्रवाई—तीनों कारणों से महत्वपूर्ण हो गया है। एक ओर मृतक के परिवार ने गंभीर आरोप लगाए हैं, वहीं श्रद्धा दुबे ने उन आरोपों को खारिज करते हुए अपना पक्ष रखा है।
ऐसी स्थिति में आवश्यक है कि जांच सभी उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर निष्पक्ष ढंग से आगे बढ़े। किसी भी आरोपी को दोषी ठहराने का अंतिम निर्णय न्यायालय की प्रक्रिया के अनुसार होगा।
InterGlobe NEWS की नजर इस मामले की आगे की कार्रवाई, अदालत में दाखिल अर्जी की स्थिति और पुलिस जांच से जुड़े आधिकारिक अपडेट पर बनी रहेगी।
स्रोत: आज तक, 19 अक्टूबर 2026; हिन्दुस्तान टाइम्स, 19 अक्टूबर 2026; एनडीटीवी, 18 अक्टूबर 2026; टाइम्स ऑफ इंडिया की प्रकाशित रिपोर्टें।
कानूनी सावधानी: यह समाचार प्रकाशित मीडिया रिपोर्टों पर आधारित है। इसमें उल्लिखित आरोप जांच के अधीन हैं। आरोपों को न्यायालय द्वारा सिद्ध किया जाना बाकी है।
