प्रयागराज | 20 अक्टूबर 2026
उत्तर प्रदेश में वर्ष 2027 में होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले इलाहाबाद हाईकोर्ट का एक महत्वपूर्ण आदेश चर्चा में है। अदालत ने वर्ष 2017 के एक हत्या मामले में दोषी ठहराए गए नंदलाल राय उर्फ बबलू राय की दोषसिद्धि और उम्रकैद की सजा पर अपील लंबित रहने तक रोक लगा दी है। अदालत ने उन्हें जमानत देने का भी आदेश दिया है। राय ने अदालत में कहा था कि वह आगामी विधानसभा चुनाव निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में या संभव होने पर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के टिकट पर लड़ना चाहते हैं।
क्या है पूरा मामला?
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, नंदलाल राय को वाराणसी की एक अदालत ने अप्रैल 2025 में वर्ष 2017 के हत्या मामले में दोषी ठहराते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई थी। यह मामला वाराणसी के सिगरा थाने में दर्ज हत्या से संबंधित है। राय ने निचली अदालत के फैसले को इलाहाबाद हाईकोर्ट में चुनौती दी और अपील पर अंतिम फैसला आने तक अपनी दोषसिद्धि तथा सजा पर रोक लगाने की मांग की।
बचाव पक्ष ने अदालत में क्या दलील दी?
राय के वकील ने अदालत में दलील दी कि उनके मुवक्किल का नाम प्राथमिकी (FIR) में दर्ज नहीं था और कथित अपराध में उनकी भूमिका का उल्लेख प्राथमिकी दर्ज होने के लगभग 17 दिन बाद सामने आया। बचाव पक्ष ने जांच, गवाहों के बयानों और कथित तौर पर हत्या में इस्तेमाल हथियार की बरामदगी पर भी सवाल उठाए। ये बचाव पक्ष की दलीलें हैं; इन पर अंतिम निर्णय अपील की सुनवाई के दौरान होना है।
हाईकोर्ट ने क्या कहा?
न्यायमूर्ति सिद्धार्थ और न्यायमूर्ति विनय कुमार द्विवेदी की खंडपीठ ने मामले की परिस्थितियों पर विचार करते हुए दोषसिद्धि और सजा पर रोक लगाने का आदेश दिया। रिपोर्टों के मुताबिक, अदालत ने आजीविका के अधिकार के महत्व का उल्लेख करते हुए कहा कि अपील पर अंतिम फैसला आने तक अपीलकर्ता की दोषसिद्धि और सजा पर रोक लगाने पर विचार किया जाना चाहिए। अदालत ने यह भी ध्यान में रखा कि दोषसिद्धि बरकरार रहने पर उनके चुनाव लड़ने के अवसर पर असर पड़ सकता है।
जमानत के साथ लगाई गईं शर्तें
रिपोर्टों के अनुसार, हाईकोर्ट ने जमानत के साथ कुछ शर्तें भी निर्धारित की हैं:
- अदालत की अनुमति के बिना वह अपने नाम की अचल संपत्ति बेचने या हस्तांतरित करने सहित उस पर कोई नया भार नहीं बना सकेंगे।
- मौजूदा पता बदलने पर निर्धारित समय के भीतर संबंधित जानकारी देनी होगी।
- जेल से रिहा होने के एक महीने के भीतर निचली अदालत द्वारा लगाए गए जुर्माने की 50 प्रतिशत राशि जमा करनी होगी।
- जुर्माने की शेष 50 प्रतिशत राशि की वसूली पर अपील लंबित रहने तक रोक रहेगी।
क्या अब चुनाव लड़ सकेंगे?
हाईकोर्ट के आदेश से राय को कानूनी राहत मिली है, लेकिन इसे हत्या के मामले में अंतिम रूप से बरी होना नहीं माना जाना चाहिए। उनकी आपराधिक अपील अभी लंबित है। चुनाव लड़ने की पात्रता और उससे जुड़े अन्य कानूनी पहलुओं का निर्धारण लागू कानून तथा संबंधित परिस्थितियों के अनुसार होगा।
कानूनी दृष्टि से क्यों महत्वपूर्ण है यह मामला?
यह मामला दोषसिद्धि पर रोक, अपील के दौरान राहत और चुनाव लड़ने की पात्रता के बीच संबंध को सामने लाता है। हाईकोर्ट ने अपने आदेश में मामले की विशिष्ट परिस्थितियों पर विचार किया है। अंतिम फैसला आने तक निचली अदालत के निर्णय के विरुद्ध दायर अपील का नतीजा महत्वपूर्ण रहेगा।
निष्कर्ष: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने नंदलाल राय उर्फ बबलू राय की दोषसिद्धि और उम्रकैद की सजा पर अपील लंबित रहने तक रोक लगाते हुए उन्हें जमानत दी है। अब मामले में आगे की कानूनी कार्यवाही और अपील पर होने वाली सुनवाई पर नजर रहेगी।
नोट: यह समाचार उपलब्ध मीडिया रिपोर्टों पर आधारित है। दोषसिद्धि और सजा पर रोक को अंतिम बरी होने के रूप में प्रस्तुत नहीं किया जाना चाहिए।
