नई दिल्ली, 15 अक्टूबर 2026। सुप्रीम कोर्ट ने कर्नाटक के शृंगेरी विधानसभा क्षेत्र में 2023 के चुनाव के दौरान हुई मतगणना की वीडियो रिकॉर्डिंग उपलब्ध नहीं करा पाने पर भारतीय निर्वाचन आयोग (ECI) से कड़ी नाराजगी जताई। अदालत ने सवाल किया कि जिस संस्था की जिम्मेदारी चुनाव कराना है, उसके पास चुनाव से जुड़े जरूरी रिकॉर्ड आखिर क्यों नहीं हैं?
सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग से क्या कहा? न्यायमूर्ति संजय कुमार और न्यायमूर्ति संजीव सचदेवा की पीठ इस मामले की सुनवाई कर रही थी। सुनवाई के दौरान चुनाव आयोग की ओर से पेश वकील ने बताया कि वर्ष 2023 में हुई मूल मतगणना की वीडियो रिकॉर्डिंग का पता नहीं चल पा रहा है और उसे तलाशने का प्रयास किया जा रहा है।
इस पर अदालत ने नाराजगी जताते हुए सवाल किया कि चुनाव आयोग अपने ही कराए गए चुनाव से संबंधित रिकॉर्ड के गायब होने की बात कैसे कह सकता है।
अदालत ने निर्देश दिया कि अगली सुनवाई पर आयोग के पास उपलब्ध सभी संबंधित रिकॉर्ड पेश किए जाएं। साथ ही चेतावनी दी कि रिकॉर्ड प्रस्तुत नहीं किए जाने पर आयोग के खिलाफ प्रतिकूल निष्कर्ष निकाला जा सकता है।
क्या है पूरा मामला?
यह विवाद कर्नाटक की शृंगेरी विधानसभा सीट से जुड़ा है, जहां वर्ष 2023 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस उम्मीदवार टीडी राजेगौड़ा ने भाजपा उम्मीदवार डीएन जीवराज को 201 वोटों के अंतर से हराया था।
इसके बाद भाजपा उम्मीदवार ने कर्नाटक हाईकोर्ट में चुनाव परिणाम को चुनौती दी। मामले की सुनवाई के दौरान डाक मतपत्रों की दोबारा गिनती का आदेश दिया गया।
पुनर्गणना के बाद मई 2026 में संशोधित परिणाम घोषित किया गया, जिसमें भाजपा उम्मीदवार डीएन जीवराज को विजेता बताया गया। इसके बाद टीडी राजेगौड़ा ने संशोधित चुनाव परिणाम को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी।

वीडियो रिकॉर्डिंग क्यों है महत्वपूर्ण? इस मामले में मतगणना की वीडियो रिकॉर्डिंग महत्वपूर्ण साक्ष्य है। इसके माध्यम से अदालत यह जांच कर सकती है कि मतगणना के दौरान निर्धारित प्रक्रिया का पालन हुआ या नहीं और डाक मतपत्रों की पुनर्गणना में कोई अनियमितता हुई या नहीं
।मूल मतगणना की रिकॉर्डिंग उपलब्ध नहीं होने से मामले में महत्वपूर्ण साक्ष्य की जांच प्रभावित हो सकती है। हालांकि, केवल रिकॉर्डिंग उपलब्ध नहीं होने से अपने आप यह साबित नहीं होता कि चुनाव में अनियमितता हुई थी।
सुप्रीम कोर्ट ने आगे क्या निर्देश दिया? अदालत ने चुनाव आयोग को उपलब्ध रिकॉर्ड पेश करने का निर्देश दिया है। मामले की अगली सुनवाई 15 फरवरी 2027 को निर्धारित की गई है।
यदि आयोग अगली सुनवाई तक आवश्यक रिकॉर्ड प्रस्तुत करने में विफल रहता है, तो अदालत उसके खिलाफ प्रतिकूल निष्कर्ष निकालने पर विचार कर सकती है। यह अंतिम फैसला नहीं, बल्कि मामले की सुनवाई के दौरान अदालत की ओर से दी गई चेतावनी है।
निष्कर्ष
इस मामले ने चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता और रिकॉर्ड सुरक्षित रखने की जिम्मेदारी को लेकर महत्वपूर्ण सवाल खड़े किए हैं। अब सबकी नजर अगली सुनवाई पर रहेगी, जहां चुनाव आयोग को उपलब्ध रिकॉर्ड के संबंध में अदालत के समक्ष स्थिति स्पष्ट करनी होगी।
